ऑनलाइन तबादला पॉलिसी पर कानूनी विवाद की छाया

हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में सिविल पिटीशन दायर, कई हो चुकी खारिज

एक बार फिर से हरियाणा की ऑनलाइन तबादला पॉलिसी पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दे दिए जाने के कारण कानूनी पचड़ों में पड़ी हुई हैं। पूरे मामले में बड़ी संख्या में सिविल पिटीशन दायर की गई हैं, जिसमें से काफी संख्या में खारिज भी हो चुकी हैं। दरअसल, ऑनलाइन तबादला पॉलिसी को लेकर याचिका दायर करने वालों ने कईं तरह के सवाल उठाए हैं। इसमें कपल केस से लेकर उम्र के ज्यादा नंबर दिए जाने के साथ ही नीति में चले आ रहे झोल की तरफ ध्यान दिलाया गया है। जिस कारण अदालत भी पूरे मामले में गंभीरता के साथ में सुनवाई कर रही है, साथ ही नीति में संशोधन कर लाने की हिदायत भी अभी से दी गई है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में कुल मिलाकर सौ से ज्यादा याचिका दायर की गई थी, जिसमें से पचास का निस्तारण हो चुका है। कर्मचारियों की याचिकाओं को लेकर लगातार सुनवाई चल रही है, इस माह के अंतिम सप्ताह में फिलहाल, सुनवाई होनी है लेकिन तब तक तबादलों पर रोक लगी हुई है।

सरकार से जवाब तलब

सरकार की मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर अदालत में सिविल रिट पिटीशन में नीति के तहत दिए गए प्रावधानों पर ही सवाल उठा दिए गए हैं। नीति में दोहरी नौकरी वालों को हर बार फायदा हो रहा है। इसके अलावा उम्रदराज लोगों को भी इसमें तरजीह दी गई है। अदालत में दायर याचिका में पूछ लिया गया है कि अगर कपल केस नहीं है, एक की सरकारी नौकरी और दूसरी की निजी क्षेत्र की है, तो उनका क्या कसूर है। कुल मिलकार उम्रदराज मामलों में अतिरिक्त अंक दिए जाने पर भी सवाल उठ रहे है।

आरोप: मेरिट पॉइंट्स पारदर्शी नहीं

याचिकाओं में मुख्य तौर पर आरोप लगाया गया है कि ट्रांसफर में मार्किंग सिस्टम और मेरिट पॉइंट्स पारदर्शी नहीं हैं। कुछ वगों को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान नीति में भेदभावपूर्ण रवैये की बात दर्शाता है। हाईकोर्ट ने गंभीर मानते हुए सरकार नोटिस भेजा था। इनमें से काफी याचिकाएं खारिज और निस्तारित कर दी गई हैं। इसमें कोर्ट ने पॉलिसी को वैध मानते हुए ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को उचित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। अदालत इस पॉलिसी के हर पहलू को चेक कर रही है। अदालत ने यह तो माना है कि प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार यह अहम है, लेकिन आनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी मनमानी नहीं है। प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार ट्रांसफर तय करना सरकार के अधिकार में हैं। लेकिन नई याचिकाओं में उठे नए मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई चल रही है।

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