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दिव्यांग कर्मियों की 60 वर्ष सेवा आयु बढ़ोतरी वापस लेने का फैसला सही- हाई कोर्ट

कानून में सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाने का नहीं है अधिकार

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा दिव्यांग कर्मचारियों को दी गई 60 वर्ष तक की बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति आयु की सुविधा वापस लेने के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि संबंधित कानून में ऐसी बढ़ोतरी का कोई गया है।


जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा व जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेवा नियमों में संशोधन कर 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता अथवा दृष्टिहीन कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा में बने रहने का प्रविधान हटाने में कोई कानूनी खामी नहीं है। पहले ऐसे कर्मचारी, जो 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से ग्रस्त थे या दृष्टिहीन थे, उन्हें 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति थी, जबकि अन्य कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष निर्धारित थी। अब यह विशेष प्रविधान हटा दिया गया है।


यह विवाद छह नवंबर 2025 को दिए गए जोरा सिंह बनाम हरियाणा सरकार मामले के फैसले से जुड़ा है। उसमें 70 प्रतिशत दिव्यांगता की शर्त को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 40 प्रतिशत या उससे है।


अधिक दिव्यांगता वाले सभी व्यक्ति एक समान वर्ग हैं और राज्य उनके भीतर उप-वर्ग नहीं बना सकता। इस मामले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य यह निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है कि दिव्यांग कर्मचारियों को बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति आयु दी जाए या नहीं 


सरकार ने पुनर्विचार कर बढ़ोतरी वापस ले ली। अब याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सेवानिवृत्ति आयु में बढ़ोतरी उचित समायोजन का हिस्सा है और इसे वापस नहीं लिया जा सकता। वहीं दूसरी ओर अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 'कश्मीरी लाल शर्मा' मामले में की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि सेवा नियमों में संशोधन कर बढ़ी हुई सेवा आयु का प्रविधान हटाना राज्य का वैध नीतिगत निर्णय है